Aashayein...
Writer: Monika Sharma
Character - Ashutosh, Disha, Jyoti, Amrita,
Doctor, Nurse
Aashayein...
हम इन्हें तो नहीं बचा सकते पर हम इनके ऑर्गन की वजह से कई लोगों की जान बचा सकते हैं। यहां कई ऐसे मरीज हैं जिनकी जान बच सकती है इनके ऑर्गन से। दिशा डॉक्टर की यह बात सुनकर सोच में पड़ जाती है
दिशा उदास होकर हॉस्पिटल मैं बाहर घूम रही होती है तभी उसकी नजर एक छोटी लड़की [ ज्योति ] पर पड़ती है जो एक कोने में अकेले बैठकर रो रही होती है। वह उसके पास जाती है और उसके कंधे पर हाथ रखती है और उससे पूछती है क्या हुआ ?? तुम रो क्यों रही हो ?? ज्योति उसे रोते हुए बताती है मेरे पापा वह बीमार है। मैं उन्हें नहीं खोना चाहती। तब दिशा उससे पूछती है क्या हुआ है तुम्हारे पापा को ??
पीछे से डॉक्टर और उसकी मां आ जाती है। डॉक्टर उन्हें बोलता है आप आइए मेरे साथ और उन्हें लेकर एक मरीज के पास जाता है और बताता है।नशे की वजह से इनके सारे ऑर्गन खराब हो चुके हैं। अब इन्हें तब भी बचाया जा सकता है जब इन्हें किसी ओर के ऑर्गन मिल जाए। वरना हम इन्हें भी नहीं बचा पाएंगे। और ज्योति को प्यार से देखते हुए कहता है इस मासूम बच्ची का इनके सिवा और कोई नहीं है।
दिशा के दिमाग में ज्योति और डॉक्टर की कही हुई बात गूंजने लगती है।वह ज्योति को गले लगा लेती है और अमृता से बोलती है। मां क्या हम इन्हें नहीं बचा सकते ?? क्या हम इन्हें पापा के ऑर्गन नहीं दे ?? सकते और अपनी मां की तरफ आशा भरी नजरों से देखती है और कहती है मां पापा को तो हम नहीं बचा सकते पर हम इन अंकल को पापा के ऑर्गन दे सकते हैं हो सकता है यह बज जाए। और अपनी मां से रिक्वेस्ट करती है प्लीज मान जाइए ना मां।
डॉक्टर अमृता को समझाता है। हम इन्हे मिस्टर आशुतोष के ऑर्गन दे सकते हैं। अमृता थोड़ी देर सोचती है और फिर ज्योति के पास जाकर उसके फेस पर प्यार से हाथ फेर कर कहती है - हम आपके पापा को कुछ नहीं होने देंगे और डॉक्टर की तरफ देख कर देती है - हम तैयार हैं आप इन्हें मेरे पति के ऑर्गन दे दीजिए....

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